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सुप्रीम कोर्ट का UPI चार्ज पर रोक से इनकार, केंद्र सरकार और RBI से मांगा जवाब

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए इस पर तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने मामले में केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा है। 2,000 रुपये की सीमा पर केंद्र से जवाब तलब मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने एडवोकेट अंजन दत्ता द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक विशेष हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि आखिर 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर शुल्क लगाने का निर्णय क्यों लिया गया। बिना चर्चा के सीमा तय करने पर उठाए गए सवाल याचिकाकर्ता एडवोकेट अंजन दत्ता ने केंद्र द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए कोर्ट में तर्क दिया कि: ₹2,000 की सीमा किस आधार पर तय की गई है? यूपीआई और रूपे (RuPay) कार्ड के लिए अलग-अलग नियम क्यों लागू किए गए हैं? याचिका में इस नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की गई है। आम लोगों और 96% व्यापारियों पर असर नहीं: सरकार सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एन. वेंकटरमण ने अदालत में सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा: आम नागरिकों के बीच (P2P): एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। छोटे व्यापारी: देश के लगभग 96% छोटे-मोटे दुकानदारों और व्यवसायों के भुगतान पर इस शुल्क का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट अब केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं के जवाब दाखिल करने के बाद मामले की अगली सुनवाई करेगा।