कवर्धा | 13 अक्टूबर 2026 राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान योजना) और 'सेवा संकल्प अभियान' ग्रामीण महिलाओं के जीवन में किस तरह सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं, इसकी एक प्रेरणादायक बानगी कबीरधाम जिले से सामने आई है। जिले के विकासखंड बोड़ला अंतर्गत वनांचल ग्राम रेंगाखारकला की रहने वाली श्रीमती चुन्नी कुम्भकार आज अपनी मेहनत और सरकारी योजनाओं के बल पर 'लखपति दीदी' के रूप में पहचानी जा रही हैं। कभी आर्थिक तंगी और अभावों में जीवन बिताने वाली चुन्नी ने मिट्टी के बर्तनों को नया आकार देकर न सिर्फ अपने परिवार की तकदीर बदली, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए एक मिसाल बन गई हैं। अभावों से भरा था शुरुआती जीवन श्रीमती चुन्नी कुम्भकार, गौरी महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। बिहान योजना से जुड़ने से पहले उनका परिवार पारंपरिक रूप से मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करता था, लेकिन आधुनिक संसाधनों की कमी और सीमित पूंजी के कारण आमदनी बहुत कम थी। परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो रहा था, और व्यवसाय को बढ़ाना तो दूर की बात थी। 'बिहान योजना' ने खोले सफलता के द्वार जरूरतमंद ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित बिहान योजना चुन्नी कुम्भकार के जीवन में टर्निंग पॉइंट साबित हुई। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें वित्तीय सहायता (लोन) और तकनीकी मार्गदर्शन मिला। इस मदद से उन्होंने अपने पारंपरिक व्यवसाय को आधुनिक और बड़े पैमाने पर शुरू किया: विस्तृत उत्पाद निर्माण: दीया, मटका, पारंपरिक बर्तन और विभिन्न प्रकार की आकर्षक मूर्तियां। बेहतर मार्केटिंग: स्थानीय बाजारों के साथ-साथ जिला और राज्य स्तरीय उत्सवों, विभिन्न महोत्सवों तथा क्षेत्रीय एवं राज्य स्तरीय 'सरस मेलों' में अपने मिट्टी शिल्प की बिक्री। एक लाख से अधिक की शुद्ध आमदनी अपने व्यवसाय की सफलता के बारे में साझा करते हुए चुन्नी कुम्भकार बताती हैं कि समूह की मदद से मिले लोन से उन्होंने भारी मात्रा में मूर्तियों और बर्तनों का निर्माण किया। विभिन्न माध्यमों से उनके उत्पादों का कुल 1 लाख 80 हजार रुपए का व्यवसाय हुआ, जिससे उन्हें 1 लाख 20 हजार रुपए की शुद्ध आमदनी प्राप्त हुई। इस बढ़ी हुई आय से उन्हें निम्नलिखित लाभ मिले: परिवार का बेहतर भरण-पोषण। बच्चों की अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल की व्यवस्था। समाज में मान-सम्मान और 'लखपति दीदी' की विशेष पहचान। श्रीमती चुन्नी कुम्भकार की यह सफलता यह साबित करती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का साथ मिले तो ग्रामीण महिलाएं अपनी मेहनत के दम पर सफलता के नए आयाम गढ़ सकती हैं।
कवर्धा में बदली तस्वीर: बिहान योजना से जुड़ीं जंगल रेंगाखार की चुन्नी कुम्भकार बनीं 'लखपति दीदी', मिट्टी को आकार देकर संवारा अपना भविष्य